Mon 06 Jul 2026

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पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास तथा ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारी कार्यवाही प्रतिवेदन सहित तलब

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पोषण आहार के कथित 800 करोड़ रुपये के घोटाले में लोकायुक्त सख्त : पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास तथा ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारी कार्यवाही प्रतिवेदन सहित तलब

Kailash Gupta

Sun, Jul 5, 2026
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भोपाल। पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा महालेखाकार (एजी) की वर्ष 2018 से 2021 के दौरान पोषण आहार की आठ जिलों में की गई जांच के आधार पर दिनांक 28 अगस्त 2023 को लोकायुक्त के समक्ष लगभग 800 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के संबंध में तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस तथा तत्कालीन संचालक, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ललित मोहन बेलवाल सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई थी।

शिकायत में बेलवाल की कथित नियम-विरुद्ध संविदा नियुक्ति, उन्हें वित्तीय अधिकार दिए जाने, उनके विरुद्ध अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों द्वारा की गई जांच में प्रतिकूल निष्कर्ष आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने तथा शिकायत उठाने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित किए जाने जैसे गंभीर बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका का दस्तावेज़ों सहित विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया गया है।

शिकायत पर लोकायुक्त कार्यालय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से महालेखाकार की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्राप्त करने के लिए अब तक 14 पत्र भेजे हैं। पहला पत्र क्रमांक 5752 दिनांक 30 अक्टूबर 2023 तथा चौदहवाँ पत्र क्रमांक 2520 दिनांक 23 जून 2026 को अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजा गया। इसके बावजूद विभाग आज तक कार्यवाही प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर सका।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्वयं पाँच बार अतिरिक्त समय मांगा। क्रमशः 20 नवंबर 2023, 14 अगस्त 2024, 15 अक्टूबर 2024, 13 नवंबर 2024 तथा 20 मार्च 2025 को भेजे गए पत्रों में विभाग ने एक से दो माह का समय बढ़ाने का अनुरोध किया। लोकायुक्त ने प्रत्येक बार विभाग के अनुरोध को स्वीकार करते हुए पर्याप्त अवसर प्रदान किया, किंतु विस्तारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी आज तक कार्यवाही प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।

लगभग तीन वर्ष बीत जाने, 14 अनुस्मारक पत्र, पाँच बार समय-वृद्धि, और उसके बाद भी प्रतिवेदन प्रस्तुत न किया जाना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इससे यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसा कौन-सा कारण है जिसके चलते महालेखाकार की रिपोर्ट पर विभाग अपनी स्थिति स्पष्ट करने से लगातार बचता रहा।

लोकायुक्त कार्यालय ने प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को भी अनेक अवसर दिए, किंतु अपेक्षित कार्यवाही प्रतिवेदन वहां से भी प्राप्त नहीं हुआ।

दिनांक 8 जून 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत जानकारी पर माननीय लोकायुक्त ने स्पष्ट टिप्पणी की कि प्रस्तुत जानकारी मांगी गई जानकारी के अनुरूप नहीं है तथा उसमें विरोधाभास है। इसके बाद प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ग्रामीण आजीविका मिशन को भी 24 अगस्त 2026 को कार्यवाही प्रतिवेदन सहित लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा कि यदि किसी विभाग को बार-बार समय देने के बाद भी वह वर्षों तक कार्यवाही प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करता, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता का विषय नहीं रह जाता, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि 24 अगस्त 2026 की सुनवाई में संबंधित विभाग संपूर्ण तथ्यों के साथ उपस्थित होंगे और महालेखाकार की रिपोर्ट पर अब तक की गई कार्रवाई का स्पष्ट एवं तथ्यात्मक विवरण लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

पोषण आहार जैसे संवेदनशील विषय से प्रदेश की लाखों माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य जुड़ा है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या कार्रवाई में अनावश्यक विलंब केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनहित और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा अत्यंत गंभीर प्रश्न है।

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