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ऊबड़-खाबड़ रास्ते और बड़े पत्थरों से पैदल चलना हुआ मुश्किल, संतों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी

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आहू में पुल निर्माण का डायवर्सन बना मुसीबत : ऊबड़-खाबड़ रास्ते और बड़े पत्थरों से पैदल चलना हुआ मुश्किल, संतों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी

Kailash Gupta

Fri, Jul 3, 2026
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चातुर्मास पदयात्रा पर निकले जैन संतों को करना पड़ा कष्टदायक सफर

राजेश चौहान कि रिपोर्ट

बदनावर,धार । ग्राम आहू में पुल निर्माण कार्य के दौरान बनाया गया अस्थायी डायवर्सन इन दिनों आमजन और यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। डायवर्सन पर बड़े-बड़े पत्थर, गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते होने से पैदल चलने वालों, दोपहिया वाहन चालकों तथा अन्य राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और अधिक जोखिमभरा होने की आशंका है, जिससे कभी भी दुर्घटना की स्थिति बन सकती है।

इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है। साथ ही आहू स्थित पार्श्वनाथ मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और संतों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक डायवर्सन को सुरक्षित और समतल बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

तख्तों की व्यवस्था भी नहीं आई काम

ग्रामीणों ने संतों के आवागमन को देखते हुए डायवर्सन पर तख्त लगाने का प्रयास किया, लेकिन बड़े-बड़े पत्थरों और असमतल रास्ते के कारण यह व्यवस्था भी पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप संतों और श्रद्धालुओं को भारी कठिनाई के बीच रास्ता पार करना पड़ा।

नंगे पैर चलने वाले जैन संतों ने झेली कठिनाई

बड़ौदा से इंदौर चातुर्मास के लिए पदयात्रा कर रहे लगभग 40 जैन संत जब आहू पहुंचे तो उन्हें इसी बदहाल डायवर्सन से होकर गुजरना पड़ा। जैन परंपरा के अनुसार बिना चप्पल के पदयात्रा करने वाले संतों को बड़े-बड़े पत्थरों और ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर चलना पड़ा, जिससे उन्हें काफी कष्ट उठाना पड़ा। संतों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

भव्य स्वागत, फिर भी रास्ते की बदहाली बनी चर्चा का विषय

आहू नगर में करीब 40 जैन संतों का बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान लगभग 200 श्रद्धालु और ग्रामीण मौजूद रहे। स्वागत समारोह श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ, लेकिन संतों को बदहाल डायवर्सन से गुजरना पड़ा, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि पुल निर्माण पूरा होने तक डायवर्सन को तत्काल समतल एवं सुरक्षित बनाया जाए, बड़े पत्थरों को हटाया जाए और आवागमन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन, श्रद्धालुओं और संतों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। बरसात से पहले आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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