: संभलकर चलें, पीथमपुर मे नहीं होती वाहनों की फिटनेस जांच, हादसों की आशंका बरकरार
Sun, Nov 20, 2022
परिवहन विभाग द्वारा लंबे समय से नहीं की गई वाहनों की जांच
पीथमपुर। शहर सहित जिलेभर में वाहनों की फिटनेस जांच नहीं हो रही है। परिवहन विभाग द्वारा लंबे समय से वाहनों की जांच ही नहीं की गई है। स्थिति तो यह है कि शहर सहित जिलेभर में सैकड़ों कंडम वाहन भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। प्रारंभिक जांच ही नहीं हो रही ऐसे में वाहनों में क्रैश टेस्ट रेटिंग, सीट बेल्ट, एयरबैग, टायर, एंटी फागिंग लाइट, ब्रेकिंग सिस्टम आदि बिंदुओं का ख्याल ही नहीं रखा जा रहा है।शहर में स्थिति देखी जाए तो सैकड़ों चार पहिया वाहन ऐसे सड़कों पर दौड़ते नजर आ जाएंगे, जिनमें फिटनेस का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। कई वाहन ऐसे भी सड़कों पर चल रहे हैं, जिनकी नंबर प्लेट तक गायब है। ऐसे में यदि वाहन दुर्घटना हो जाए तो इन वाहनों को पकड़ना भी संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। स्थिति तो यह है कि सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्राली भी चल रहे हैं, किंतु ट्रालियों में रेडियम तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में गंभीर सड़क हादसों की आशंका बनी हुई है।
दिखावे के लिए होती है जांच
लापरवाही का आलम यह है कि स्कूल बसों की फिटनेस जांच के नाम पर परिवहन विभाग द्वारा स्कूल खुलने के समय जांच अभियान महज दिखावे के लिए चलाया जाता है। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। शहर में कई स्कूल बसें भी ऐसे हैं जिनमें यातायात संबंधी नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसके बावजूद लापरवाही बरकरार है।
यात्री बसों की नहीं हुई जांच
वर्तमान में स्थिति यह है कि कई यात्री बसों में फिटनेस का अभाव है, वहीं शहर के एबी रोड पर निर्धारित गति सीमा के बावजूद तेज गति से बसें चलती हैं। ऐसे में कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
: आधार कार्ड के लिए दर-दर भटक रही विकलांग युवती
Sun, Nov 20, 2022
पीथमपुर। औद्योगिक नगरी में एक विकलांग युवती के पास आधार कार्ड नहीं होने के कारण उसका जीवन यापन बंद हो गया है। आधार कार्ड के लिए युवती अपने माता पिता के साथ च्वाइस सेंटर से लेकर जिला प्रशासन तक से कई बार गुहार भी लगा चुकी है, बावजूद इसके अब तक कोई सनुवाई नहीं हुई है।बता दें कि 18 वर्षीय अवंतीर मरी माता टेकरी में रहती है. युवती सही से चल फिर नही पाती । अवंति के पास राशन कार्ड नहीं है. लिहाजा, बाहर से महंगा अनाज खरीद कर दोनों मां-बेटे को अपना पेट भरना पड़ता है. आलम यह है कि इतना सब होने के बावजूद युवती का न तो अभी तक विकलांग प्रमाण पत्र बन पाया है और ना ही उसका आधार कार्ड बना है.मजबूरन युवती को औने पौने दाम में व्यापारियों और कोचियों को धान बेचकर घर का खर्च चलाना पड़ रहा है.अवंती के परिजन बताते है कि नगर पालिका से लेकर एसड़ीएम तक आधार कार्ड की गुहार लगाई लेकिन समस्या का निराकरण नही हुआ। बहरहाल, शासन और प्रशासन दोनों को इस ओर पहल करनी चाहिए, ताकि महिला के परिवार का सही ढंग से पालन पोषण हो सके।