राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद : अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त ने मंत्री के खिलाफ जारी किया नोटिस
Kailash Gupta
Tue, Jun 30, 2026

भोपाल। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी इन दिनों एक बड़े विवाद में घिरी हुई हैं। अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया है। यह पूरा मामला उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता और उससे जुड़े जमीनी दस्तावेजों से जुड़ा है।
नोटिस में साफ कहा गया है कि 6 जुलाई को राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति की बैठक होगी। मंत्री को इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है। उन्हें अपने दावों को साबित करने वाले सभी मूल दस्तावेज भी साथ लाने होंगे।
कोर्ट के रुख के बाद हरकत में आई समिति
यह मामला अचानक नहीं उठा। इससे पहले न्यायालय की तरफ से भी प्रतिमा बागरी की जाति को लेकर नोटिस जारी किया जा चुका था। कोर्ट के इस कड़े रुख को संज्ञान में लेते हुए राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने अब फाइल दोबारा खोल दी है और कार्रवाई तेज कर दी है।
समिति ने मंत्री को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने सभी प्रामाणिक और मूल दस्तावेजों (फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामला) के साथ पेश हों। दस्तावेजों की जांच के बाद ही समिति जाति की वैधता पर अंतिम फैसला लेगी।
1950 का रिकॉर्ड बनेगा अहम आधार
इस जांच का सबसे बड़ा बिंदु वर्ष 1950 का रिकॉर्ड है। नोटिस में कहा गया है कि प्रतिमा बागरी (प्रतिमा बागरी मंत्री) को यह साबित करना होगा कि 1950 की स्थिति में उनका परिवार जिला सतना का मूल निवासी था। इसके लिए पुख्ता दस्तावेज और प्रमाण पत्र समिति के सामने रखने होंगे। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अनुसूचित जाति का दर्जा मूल निवास और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर तय होता है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस नोटिस के सामने आते ही मध्यप्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। प्रतिमा बागरी भाजपा सरकार में राज्य मंत्री हैं, इसलिए यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सियासी दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। 6 जुलाई की बैठक से पहले कयासों का बाजार गर्म है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मंत्री समिति के सामने कौन से दस्तावेज पेश करती हैं और छानबीन समिति का अंतिम फैसला क्या होगा।
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