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बदनावर-टिमरवानी मार्ग निर्माण हेतु अधिकृत भूमि का मुआवजा चार गुना दिए जाने की मांग

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भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन : बदनावर-टिमरवानी मार्ग निर्माण हेतु अधिकृत भूमि का मुआवजा चार गुना दिए जाने की मांग

Kailash Gupta

Sat, Jul 4, 2026
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बदनावर । भारतीय किसान संघ द्वारा। बदनावर - टिमरवानी मार्ग निर्माण हेतु अधिकृत भूमि का बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया गया कि बदनावर-टिमरवानी मार्ग निर्माण परियोजना के अंतर्गत क्षेत्र के अनेक किसानों की कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। भारतीय किसान संघ विकास कार्यों का समर्थन करता है तथा जनहित की परियोजनाओं में किसानों के सहयोग का पक्षधर है, किंतु वर्तमान में प्रभावित किसानों को उनकी भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा प्राप्त नहीं हो रहा है। भूमि का मूल्यांकन अत्यंत कम दरों पर किए जाने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कृषि भूमि किसान की आजीविका, परिवार के भरण-पोषण तथा भविष्य की सुरक्षा का प्रमुख आधार होती है। भूमि अधिग्रहण के पश्चात किसान अपनी आय के स्थायी साधन से वंचित हो जाता है। ऐसी स्थिति में किसानों को उनकी भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर न्यायोचित प्रतिकर प्रदान किया जाना आवश्यक है।

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की भावना के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहित भूमि के बदले किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना तक मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए, जिससे प्रभावित परिवारों का आर्थिक एवं सामाजिक पुनर्स्थापन सुनिश्चित हो सके।

अतः भारतीय किसान संघ एवं समस्त प्रभावित किसानों की ओर से निम्न मांगें प्रस्तुत हैं-

1. बदनावर-टिमरवानी मार्ग निर्माण हेतु अधिग्रहित की जा रही भूमि का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।

2. क्षेत्र में प्रचलित वास्तविक बाजार दरों के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाए।

3. प्रभावित किसानों को उनकी भूमि के बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा प्रदान किया जाए।

4. जिन किसानों की अधिकांश अथवा संपूर्ण भूमि अधिग्रहित हो रही है, उनके पुनर्वास एवं आजीविका संरक्षण हेतु विशेष प्रावधान किए जाएं।

5. मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया में किसानों एवं उनके प्रतिनिधियों को शामिल कर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

उपरोक्त मांगों पर 7 दिवस के भीतर उचित एवं संतोषजनक निर्णय लेकर प्रभावित किसानों को न्याय प्रदान किया जाए। अन्यथा भारतीय किसान संघ किसानों के हित में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

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