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मुख्य लिपिक राठौड़ पर अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग

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नापतौल विभाग में 'बाबू राज' कायम : मुख्य लिपिक राठौड़ पर अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग

Kailash Gupta

Fri, Jul 17, 2026
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ऑफिस से अधिक फील्ड में रहने, रसीदों में गड़बड़ी और शासकीय कार्यों में अनियमितता के आरोप की जांच की मांग

धार से राकेश साहू

धार। जिले के नापतौल विभाग में पदस्थ मुख्य लिपिक (बाबू) जगदीश राठौर पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि वे अपने निर्धारित कार्यालयीन दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय अधिकांश समय फील्ड में रहकर कार्रवाई और जांच के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। मामले को लेकर जिला कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

बाबू का दायित्व कार्यालय में बैठकर काम करना है किन्तु बाबू राठौड़ फील्ड में अवैध वसूली में व्यस्त!

मुख्य लिपिक का दायित्व कार्यालय में बैठकर शासकीय अभिलेखों का संधारण, पत्राचार, रजिस्टरों का संधारण तथा कार्यालयीन कार्यों का निष्पादन करना है। इसके विपरीत, वे अधिकांश समय कार्यालय से बाहर रहकर फील्ड में रहकर कार्रवाई करते हैं। कार्यालय में बाबू व अधिकारी की कुर्सी हमेशा खाली रहती हैं, अधिकारी का चेंबर हमेशा की तरह बंद रहता हैं। कार्यालय में सिर्फ चपरासी ही मिलता जो बाबू राठौड़ का कार्यालयीन कामकाज कंप्यूटर पर निपटाने में लगा रहता हैं।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि नापतौल के बाटों एवं माप उपकरणों पर सील लगाने के बाद उपभोक्ताओं से ली जाने वाली शासकीय राशि की रसीदों में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं जिसकी बारीकी से उच्च स्तरीय जांच दल गठित कर जांच की जावे। आरोप है कि कई रसीदों में तिथि अंकित नहीं होती, कहीं मोबाइल नंबर दर्ज नहीं किया जाता तथा कुछ मामलों में डुप्लीकेट रसीदें दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यदि इन आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह शासकीय राजस्व के रिकॉर्ड और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय माना जा सकता है।

बाबू जगदीश राठौड़ के पास आय से अधिक संपत्ति!

शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि मुख्य लिपिक जगदीश राठौड़ की आय एवं संपत्तियों की सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी के पास उसकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति पाई जाती है, तो नियमानुसार विस्तृत जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं

आरोप है कि विभागीय अधिकारी आनंद मोहन वेरावत के पास धार के साथ-साथ अलीराजपुर जिले का भी प्रभार होने के कारण प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है, जिससे कार्यालय का संचालन मुख्य लिपिक के भरोसे चल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना शेष है। विभागीय अधिकारी का मोबाइल फोन बंद आ रहा हैं और मोबाइल नंबर बदल लिए गए हैं। जिससे विभागीय अधिकारी से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

नियमानुसार क्या हो सकती है कार्रवाई?

यदि किसी शासकीय कर्मचारी पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं, तो सक्षम अधिकारी कार्यवाही करे।

पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश

रसीदों, राजस्व अभिलेखों एवं लेखा-जोखा का विशेष ऑडिट

वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई

शासकीय धन के गबन या भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलने पर सक्षम जांच एजेंसी को प्रकरण सौंपना

आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलने पर सक्षम एजेंसी द्वारा जांच एवं विधिसम्मत कार्रवाई

जिला कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ तथा संबंधित वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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