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: बिनोद मिल्स के मजदूर की उम्मीदें फिर एक बार चकनाचूर हो गई, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य शासन द्वारा आज तक नही किया भुगतान

Kailash Gupta

Wed, Feb 2, 2022
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उज्जैन। बिनोद मिल्स के 4353 मजदूरों के परिवारों की उम्मीदें फिर एक बार चकनाचूर हो गई। जब सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका पर 30 जुलाई 2001 को 6 माह का समय देते हुए पूरा भुगतान मजदूरों को देने हेतु राज्य शासन को आदेशित किया था किंतु उसका पालन आज तक नहीं हुआ।मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने विगत माह प्रेसवार्ता में यह ऐलान किया था कि राज्य शासन की नियत साफ है और मजदूरों का भुगतान शीघ्र होगा किंतु उनकी घोषणा हवा हवाई सिध्द हुई और मजदूर 6 माह से दिन गिनता रह गया।बिनोद मिल्स संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक श्रम शिविर कोयला फाटक पर हरिशंकर शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इसमें वक्ता के रूप में ओमप्रकाश भदौरिया, भूपेन्द्रसिंह कुशवाह एडवोकेट संतोष सुनहरे, प्रद्योत चंदेल, अर्जुनलाल, मेवाराम, लक्ष्मीनारायण रजत, फूलचंद मामा आदि ने विचार व्यक्त किये। लघु वेतन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण ने भी संबोधित किया।उज्जैन मिल मजदूर संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश भदौरिया ने बताया कि समय सीमा समाप्त हो चुकी है। मजदूर संघ फिर से सर्वोच्च न्यायालय में राज्य शासन के खिलाफ अवमानना पर अवमानना याचिका प्रस्तुत करने जा रहा है। प्रद्योत चंदेल ने अपने वक्तव्य में शासन की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य शासन को न्यायालयों का खौफ नहीं रह गया है।अब सर्वोच्च न्यायालय को अपनी शक्तियों का अहसास कराना होगा। अध्यक्षीय भाषण में हरिशंकर शर्मा ने अकर्मण्य जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पालन कराने की सलाह दी। शासन संवेदनहीनता छोड़कर संविधान और प्रजातंत्र का सम्मान करें।संतोष सुनहरे ने बताया कि 27 फरवरी 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने 2 वर्ष के भीतर मजदूरों को पूरा भुगतान 4 प्रतिशत एवं 2 प्रतिशत मय ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था। इन दो वर्षों में सरकार मौन बैठी रही। 2 वर्ष बाद अवमानना याचिका लगाने पर 30 जुलाई 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने 10 प्रतिशत रकम जमा कराकर आगे समय न दिये जाने का आदेश लिखकर 6 माह में पूरा भुगतान जमा कराने का निर्णय दिया।31 जनवरी 2022 को 6 माह पूरा होने के बाद भी मजदूरों की बकाया रकम राज्य शासन ने जमा नहीं कराकर सर्वोच्च न्यायालय की दोबारा अवमानना की है। सुनहरे ने श्रमिक भाईयों से अपील की है कि वे धैर्य और संयम बनाये रखें।

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