: मध्यप्रदेश में हो सकता है अंधेरा! प्रदेश के दो पाॅवर प्लांटों में तीन-तीन दिनों का तो दो प्लांटों के पास सात दिन का कोयला शेष
Kailash Gupta
Tue, Oct 12, 2021भोपाल। सरप्लस बिजली उत्पादन के लिए अपनी पहचान बनाने वाले मध्य प्रदेश मे कोयला संकट से सरकार की मुश्किलें बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में 4 सरकारी बिजली संयंत्र हैं। अमरकंटक, सारणी, संजय गांधी और श्रृंगाजी। पिछले वर्ष 6 अक्टूबर को राज्य में 15 लाख 86 हजार टन कोयला स्टॉक में था, जबकि आज 2 लाख 23 हजार टन स्टॉक है। यही कारण है कि 5400 मेगावाट की क्षमता वाले बिजली संयंत्रों में सिर्फ 2 से 3 हजार मेगावाट बिजली ही पैदा हो पा रही है। करीब 10 हजार मेगावाट बिजली की मांग को पूरा करने के लिए केंद्रीय और निजी क्षेत्र से 6.5 हजार मेगावाट बिजली ली जा रही है। मध्यप्रदेश के उत्थान के बाद भी 80 हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता है।16 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है मांगराज्य में रबी सीजन में सबसे ज्यादा बिजली की खपत होती है
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