संत सुरक्षा हेतु : जैन समाज ने मौन जुलूस निकालकर सौंपा ज्ञापन
Kailash Gupta
Mon, May 25, 2026

बदनावर। 20 मई 2026 को रीवा में विहाररत जैन आर्यिका साध्वी संघ के साथ हुई अत्यन्त दुखद एवं हृदयविदारक दुर्घटना के विरोध एवं पूज्य आर्यिका माताजी को भावपूर्ण विनयांजलि अर्पित करने हेतु सकल जैन श्री संघ वर्धमानपुर, बदनावर द्वारा आज नगर में विशाल मौन जुलूस आयोजित किया गया।
उल्लेखनीय है कि रीवा में प्रातःकाल एक ऑल्टो कार द्वारा विहाररत जैन साध्वी संघ को टक्कर मार दी गई थी, जिसमें संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित पूज्य आर्यिका श्री उपशम मति माताजी एवं पूज्य आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी को गंभीर चोटें पहुँचीं और दोनों पूज्य माताजी की असामयिक समाधि हो गई। इस घटना से सम्पूर्ण जैन समाज में गहरा दुःख, आक्रोश एवं चिंता का वातावरण व्याप्त है।
इसी संदर्भ में आयोजित मौन जुलूस में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं एवं बच्चों ने शांत, अनुशासित एवं गरिमामय रूप से सहभागिता की। समाजजन हाथों में संत सुरक्षा, अहिंसा एवं न्याय से संबंधित संदेश एवं मांगों की तख्तियां लेकर नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकले। तख्तियों पर —
“संत सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय नीति लागू करो”,
“विहाररत संतों को सुरक्षा दो, मानवता का सम्मान करो”,
“संत सुरक्षा — राष्ट्र की नैतिक जिम्मेदारी”,
“अहिंसा के पथ पर चलने वाले संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करो”
तथा “पूज्य आर्यिका माताजी को भावपूर्ण विनयांजलि” जैसे संदेश अंकित थे, जो समाज की भावनाओं एवं मांगों को व्यक्त कर रहे थे।
जुलूस के दौरान समाजजनों ने पूर्ण शांति एवं अनुशासन बनाए रखा। मौन जुलूस नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होता हुआ बस स्टैंड पहुंचा, जहां समाज प्रमुखों द्वारा उपस्थित समाजजनों को संबोधित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निहत्थे एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो समाज को संयम, शांति एवं अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे तपस्वियों के साथ इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत पीड़ादायक एवं चिंताजनक हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, जिलाधीश धार एवं पुलिस अधीक्षक धार के नाम ज्ञापन एसडीएम एवं एसडीओपी बदनावर को सौंपा गया। ज्ञापन का वाचन समाजजनों की उपस्थिति में किया गया।
ज्ञापन में रीवा दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष SIT अथवा न्यायिक जांच कराने, सभी CCTV फुटेज एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, दोषियों पर कठोर वैधानिक कार्यवाही करने, विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने तथा भारत सरकार एवं राज्य शासन द्वारा “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाए जाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई। साथ ही स्थानीय प्रशासन एवं समाज के मध्य “Sant Security Coordination Cell” के गठन की मांग भी की गई।
समाज की ओर से शासन एवं प्रशासन से आग्रह किया गया कि इस अत्यन्त संवेदनशील विषय पर शीघ्र, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
कार्यक्रम का समापन शांतिपूर्वक विनयांजलि एवं संत सुरक्षा के संकल्प के साथ हुआ।
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