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: यदि आप भगवान की कथा सुनोगे तो भगवान आपकी व्यथा सुनेगा - पं नागर

Kailash Gupta

Tue, Nov 1, 2022
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आज की फैशन सनातन संस्कृति के लिए खतरा

  बदनावर/ तिलगारा।* सदगुरु वही है जो स्वयं भी सरल हो जिनके विचार इतने तीक्ष्ण हो, जिनके सिद्धांत इतने प्रबल हो,जिनकी तपस्या और भजन इतना बड़ा हो कि उनके दर्शन और वचन मात्र से ही शिष्य का भला हो। यह बात तिलगारा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन पं प्रभु जी नागर ने कही उन्होंने आगे कील और हथौड़े का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार कील पर एक दो हथौड़ी से मारने पर वह टेढ़ी हो जाती है लेकिन उसी किल को जब कारीगर अपनी कला से ठोकता है तो वह देखते ही देखते दीवार में चली जाती है ठीक उसी प्रकार सदगुरु वही है जो अपने ब्रह्मज्ञान और आत्मज्ञान को शिष्य के अंतः करण में उतार दे।महापुरुषों ने शब्दों को मिलाकर महाकाव्य बनाया। जिस प्रकार कवि शब्दों को जोड़ता है उसी प्रकार गुरु भी भक्तों को जोड़ता है। साथ ही पंडित नागर ने यह भी कहा कि आज की फैशन हमारी संस्कृति के लिए खतरा है जिस प्रकार के पहनावे आज चल रहे हैं वह हमारी संस्कृति के विपरित है। हमें इससे बच कर रहना है तथा हमारी संस्कृति को फ्रैंक जैसे शब्दों से बचाना है   पुस्तक एक पुस्तक है लेकिन यह व्यास गादी हे।पुस्तक आप दुकान से खरीद सकते हो लेकिन व्यास गादी उस्तक ( भगवान) तक है कथा तो कितनों नहीं कहीं लेकिन सुखदेव मुनि सो सार कहा हे । आप कथा में सुखदेव मुनि की वाणी सुनने आते हो । गलत लोगों के साथ में रहोगे तब तक आप पर अच्छाई का असर हो ही नहीं सकता   गुरु के वचन हल्दी और घी का काम करते हैं।   जिस प्रकार शरीर पर चोट लगने उसके ऊपर हल्दी और घी का लेप लगाया जाता है जिससे वह ठीक हो जाता है उसी प्रकार सदगुरु के वचन भी हल्दी और घी का काम करते हैं। कथा के बीच में पंडित नागर द्वारा मधुर भजनों जैसे मेरा तार हरी से जोड़े ऐसा कोई संत मिले, सत्संग को जब लागे रे कांटो, मेरी प्रीत नहीं छूटेगी नंदलाल से ,को गाया गया जिसमें श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर नाचने लगे।   श्रीमद् भागवत कथा परिसर में रात्रि के समय भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है इसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में रात्रि में लोग उपस्थित होकर भजनो का नाचने गाते हुए आनंद ले रहे हैं जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई त्यौहार है

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