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पवन चक्कियों से राष्ट्रीय स्तर पर बनी बदनावर की पहचान,सोलर प्लांटों से ग्रामीणों को भी मिल रहा लाभ

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अक्षय ऊर्जा का हब बनता बदनावर : पवन चक्कियों से राष्ट्रीय स्तर पर बनी बदनावर की पहचान,सोलर प्लांटों से ग्रामीणों को भी मिल रहा लाभ

Kailash Gupta

Wed, May 27, 2026
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बदनावर। बिजली की लगातार बढ़ती खपत और घटते जीवाश्म ईंधनों ने ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता को और अधिक बढ़ा दिया है। भविष्य में तेल और गैस के विकल्प के रूप में विद्युत ऊर्जा को देखा जा रहा है। यही कारण है कि दुनिया भर में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हो रहा है। सोलर प्लांट और पवन चक्कियों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मालवा क्षेत्र का बदनावर अब पवन ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्थापित पवन चक्कियों ने बदनावर को अक्षय ऊर्जा के नक्शे पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। आज क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में दूर-दूर तक पवन चक्कियां दिखाई देती हैं।

2015 से शुरू हुआ पवन ऊर्जा का विस्तार

बदनावर क्षेत्र में पवन चक्कियां लगाने का कार्य वर्ष 2015 से प्रारंभ हुआ था। इसके बाद वर्ष 2016 में सुजलॉन कंपनी द्वारा यहां 100 से अधिक पवन चक्कियां स्थापित की गईं। साथ ही बोराली में पवन चक्कियों में उपयोग होने वाले ब्लेड निर्माण का संयंत्र भी स्थापित किया गया। अब तक क्षेत्र में लगभग 800 से अधिक पवन चक्कियां स्थापित हो चुकी हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। देश के प्रतिष्ठित अदाणी समूह द्वारा तहसील के ग्राम धमाना में 324.4 मेगावाट क्षमता का विशाल पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। इस परियोजना से उत्पादित बिजली को 77 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन के माध्यम से सांवेर के हतुनिया ग्रिड तक पहुंचाया जा रहा है।

पीएम सूर्य घर योजना से बढ़ी आमजन की भागीदारी

अब तक नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े उद्योग और निवेशक ही सक्रिय थे, लेकिन महंगे खर्च के कारण आम उपभोक्ता इससे दूरी बनाए हुए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा 15 फरवरी 2024 को पीएम सूर्य घर बिजली योजना शुरू की गई। एक करोड़ परिवारों को जोड़ने के लक्ष्य के साथ इस योजना के लिए 75 हजार करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया।

इस योजना के तहत सरकारी सब्सिडी के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। दो वर्षों में ही इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रभावी दस्तक दे दी है। बदनावर तहसील में नगर सहित विभिन्न गांवों में अब तक 293 सोलर प्लांट स्थापित होकर बिजली उत्पादन कर रहे हैं। इंदौर, उज्जैन और रतलाम के सोलर वेंडर सहित डाटा, वारी और अदाणी जैसी कंपनियां भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

सब्सिडी और आसान फाइनेंस से बढ़ रहा रुझान

ग्राम दांगीखेड़ी के लोकेश यादव ने बताया कि घरेलू सोलर प्लांट पर सरकार द्वारा एक किलोवाट पर 30 हजार रुपए, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। बैंक भी इस योजना के लिए आसानी से फाइनेंस उपलब्ध करा रहे हैं। गत वर्ष तक तहसील में लगभग 100 सोलर प्लांट लगे थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या 300 के पार पहुंचने की संभावना है। सामान्यतः उपभोक्ता तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवा रहे हैं, जो गर्मियों में 400 से 500 यूनिट तक बिजली उत्पादन कर देता है। इससे लगभग तीन हजार रुपए तक का मासिक बिजली बिल शून्य हो जाता है। बरसात के दिनों में कम बिजली उत्पादन होने पर पहले से जमा यूनिट का समायोजन किया जाता है। वहीं अतिरिक्त बिजली उत्पादन होने पर विद्युत विभाग 2.78 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद भी करता है।

गांवों में भी बढ़ी सोलर ऊर्जा की मांग

तिलगारा के सोलर वेंडर नारायण पाटीदार ने बताया कि अब किसान भी अपने खेतों में विद्युत पंपों के संचालन के लिए सोलर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। क्षेत्र में तीन और पांच एचपी क्षमता के कई पंप सोलर ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं।

धमाना परियोजना से बढ़ी ऊर्जा क्षमता

अदाणी समूह द्वारा ग्राम धमाना में स्थापित 220/33 केवी पोलिंग सब स्टेशन अब 325 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू कर चुका है। इस परियोजना के तहत सोलर एनर्जी कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) के साथ 25 वर्षों के लिए बिजली खरीद समझौते किए गए हैं। पहला समझौता 274.4 मेगावाट तथा दूसरा 50 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए किया गया है। इसके लिए 2.83 रुपए प्रति यूनिट के टैरिफ पर अनुबंध हुआ था। इस संयंत्र का संचालन अदाणी समूह के एनर्जी नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर द्वारा किया जा रहा है। धार, रतलाम और उज्जैन जिलों में स्थापित पवन चक्कियों से उत्पादित बिजली धमाना पोलिंग स्टेशन तक पहुंचती है, जहां से इसे हतुनिया पावर ग्रिड तक भेजा जाता है। यह व्यवस्था भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम पावर ग्रिड कॉर्पाेरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के माध्यम से संचालित की जा रही है।

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