July 22, 2024

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मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, ओबीसी आरक्षण बना वजह

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. द सुप्रीम कोर्ट ने आज पंचायत चुनाव को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई की और सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव को स्टे कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ओबीसी सीटों को फिर से नोटिफाई किया जाए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई है. जस्टिस एएम खानविलकर और सीटी रविकुमार की बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि सामान्य वर्ग की सीटों को फिर से रि-नोटिफाई कर उन्हें सामान्य वर्ग के लिए अधिसूचित किया जाए. लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने पाया कि ओबीसी आरक्षण का नोटिफिकेशन सर्वोच्च अदालत के पूर्व में दिए गए विकास किशनराव गवली वर्सेस महाराष्ट्र राज्य के फैसले के खिलाफ था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून का पालन नहीं होगा तो भविष्य में चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट अब 27 जनवरी को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे ही ओबीसी कोटा के चलते महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव में भी स्टे कर दिया गया था. याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा कोर्ट में पेश हुए. वहीं राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ और एडवोकेट कार्तिक सेठ ने रखा. विवेक तन्खा ने बताया कि कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को संविधान के हिसाब से चुनाव कराने का निर्देश दिया है. मध्य प्रदेश में आरक्षण रोटेशन प्रणाली का पालन नहीं किया गया है, जो कि संविधान की धारा 243 (C) का उल्लंघन है.

आग से मत खेलिए

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “कृप्या आग से मत खेलिए. आपको स्थिति को समझना चाहिए. राजनीतिक मजबूरियों के आधार पर फैसले मत कीजिए. क्या हर राज्य का अलग पैटर्न होगा? सिर्फ एक संविधान है और आपको उसका पालन करना होगा. सुप्रीम कोर्ट भी एक ही है. यह चुनाव आयोग का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है. यह जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहा है.जब ऐसा ही एक आदेश दिया गया था, तब आप भी वहां थे. हम नहीं चाहते कि मध्य प्रदेश में कोई प्रयोग हो. महाराष्ट्र केस के हिसाब से इसे देखा जाना चाहिए.”बता दें कि इससे पहले चुनाव में रोटेशन प्रणाली का पालन नहीं होने के चलते चुनाव पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई से इंकार करते हुए 3 जनवरी को सुनवाई करने की बात कही. इस पर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए शुक्रवार को सुनवाई तय की थी.

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