: बदनावर में 16 मई से शुरू होगा BPL टूर्नामेंट,10 टीमें भाग लेंगी
Tue, May 7, 2024
खिलाड़ियों की बोली लगाकर हुई नीलामी
बदनावर। नगर में आईपीएल की तर्ज पर बदनावर प्रीमियर लीग-2024 (बीपीएल) का आयोजन 16 मई से किया जा रहा है। जिसको लेकर यहां खिलाड़ियों की नीलामी की गई। खिलाड़ियों की नीलामी में टीमो के मालिकों द्वारा बढ चढ़कर बोलिया लगाई गई। सबसे महंगे खिलाडी शुभमसिंह चंद्रावत बिके। टूर्नामेंट में 10 टीमें भाग ले रही है।आयोजक विधायक प्रतिनिधि जयदीप सिंह पवार (जिम्मी बना) व सरपंच योगेश मुकाती के द्वारा बताया गया की यहां रात्रि कालीन क्रिकेट टूर्नामेंट शासकीय कालेज मैदान में 16 मई से शुरू होगा। जिसमें प्रथम पुरस्कार 70 हजार रुपए व विजेता ट्राफी तथा द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपए व तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपए व विजेता ट्राफी प्रदान की जाएगी। टूर्नामेंट में मैन ऑफ द मैच समेत कई इनाम भी दिए जाएंगे।
10 टीम ले रही भाग
आयोजक ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 10 टीम भाग लेगी। जिसमें खिलाड़ियों की बोली लगाकर टीमों द्वारा खिलाड़ी खरीदे गए हैं। जिनके नाम इलेवन आल राउंडर, वेदांश इलेवन, रुद्रांश राइडर्स, आराध्या इलेवन, पावर हीटर बायस, नीलम कार केयर, आरसीबी इलेवन, विधि वारियर्स व नर्मदा टीवीएस टीम है।टूर्नामेंट में मैच आठ आठ ओवर के होंगे। कालेज मैदान पर टूर्नामेंट को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। टूर्नामेंट को लेकर प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। बड़े स्तर पर आयोजित ह्यो रहे क्रिकेट टूर्नामेंट को लेकर क्रिकेटप्रेमियों में भी उत्साह देखा जा रहा है।
: कोटेश्वर महादेव धाम बन सकता है धार्मिक पर्यटन केंद्र
Mon, May 6, 2024
महाकाल लोक के कारण इस तीर्थ पर भी आवागमन बढ़ रहा
बदनावर। (पुरुषोत्तम शर्मा लेबड़-नयागांव फोरलेन पर कानवन से 12 किमी दूर विध्याचंल की सुरम्य पहाड़ियों में स्थित अति प्राचीन कोटेश्वर महादेव धाम है। जो क्षेत्र ही नहीं वरन आसपास के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। आस्था के साथ-साथ यह स्थल पर्यटन का भी एक प्रमुख केंद्र है, जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसकी प्राचीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथ श्रीमद् भागवत महापुराण के दशम स्कंध के अलावा चार वेदों में से दो वेद युर्जवेद व सामवेद में इसका उल्लेख मिलता है। यही नहीं भगवान श्रीकृष्ण के चरण रज इस तीर्थ स्थल को और पवित्र कर दिया है। तो संत सुकाल भारती की तपोभूमि भी रही है। वर्षाकाल में हरियाली की चादर बिछने पर यह सबका मन मोह लेता है। यह सब होने के बावजूद यह अतिप्राचीन तीर्थ वर्षो से पर्यटन के रूप में विकसित होने की बांट जोह रहा है।
भगवान श्रीकृष्ण के चरणों की पावन रजभूमि एवं सिद्ध संत सुकाल भारती की तपोस्थली के रूप में कोटेश्वर धाम विश्व विख्यात है। किवंदति है कि भगवान श्रीकृष्ण जब रुक्मणी का हरण कर कुंदनपुर (अमझेरा) जा रहे थे। तब उन्होंने यहां विश्राम किया था और ओमकार स्वरूप शिवलिंग की स्थापना कर पूजन किया था। कोटेश्वर तीर्थ के संस्थापक संत सुकाल भारती ने यहां तप किया और विक्रम संवत 551 में यहां समाधि ली थी। यह तीर्थ सिद्ध तपस्वियों की तपस्या का प्रतिफल के रूप में प्रकट हुआ है। जिसके प्रमाण स्वरूप यहां 11 सिद्धाें की समाधि विद्यमान है।
1980 से पुरातत्व के अधीन
पाकिस्तान के सिंध प्रांत की तरह यहां भी हिंगलाज माता का मंदिर है, उन्हीं का स्वरूप मानकर इनकी पूूजा अर्चना की जाती है। इस स्थल पर धर्मेंद्र भारती की स्मृति में धर्मस्व मंदिर जो 14 वीं शती में भूमिज शैली में निर्मित है। इसको वर्ष 1980 से पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन लेकर संरक्षित स्थल घोषित किया है। यहां करीब 1530 वर्षो से कार्तिक मास की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष पांच दिवसीय मेला लगता है।
स्वयंभू शिवपंचायतन सिर्फ कोटेश्वर में
प्राकृतिक रूप से स्वयंभू शिव पंचायतन सिर्फ कोटेश्वर महादेव धाम में ही है। यहां गुफा में विष्णु, सूर्य, देवी, गणपति विराजमान है और मध्य में कोटेश्वर महादेव स्थापित है। जिन्हें शिव पंचायतन कहा जाता है। विद्धान पंडितों के मुताबिक इस प्रकार से शिव पंचायतन अन्य कहीं शिवालयों में देखने को नहीं मिलती है। श्रावण मास में पांचों प्रहर पूजना अर्चना मठाधीशों द्वारा की जाती है।
पर्यटन की है अपार संभावनाएं
विश्व विख्यात पंडित प्रदीप मिश्रा यहां साल 2023 में पंच पुष्प शिवमहापुराण कथा का आयोजन हुआ था। इसके बाद इस तीर्थ की ख्याति चहुंओर ओर फैल गई। तीर्थ के साथ ही आसपास सामाजिक वानिकी की वनरोपणी की 50 हेक्टेयर भूमि है। हिंगलाज माता मंदिर से एक नीचे नाला बहता है। जिस पर बांध बनाकर पानी रोकने से वहां नौकायन, तैराकी भी प्रारंभ की जा सकती है। इसके लिए प्रयास भी हुए लेकिन बाद में इस पर आगे काम नहीं हो पाया। वैसे भी यहां विध्यांचल की पहाड़ियों की पवित्र गुफा में स्थित शिवलिंग पर गंगा की जलधाराएं प्राकृतिक रूप से अभिषेक करती है। कार्तिक पूर्णिमा पर कुंड दीपों की रोशनी से झिलमिला उठता है। महिलाएं अपने मनोरथ की पूर्ति के लिए आटे के बनाए दीप जल में प्रवाहित करती है। श्रावण के पूरे मास में श्रद्धालुआें एवं कावड़ियों का यहां तातां लगा रहता है।
22 वर्षो से अविरल अखंड कीर्तन
कोटेश्वर तीर्थ में 19 मई 2002 से सतत 24 घंटे हरे राम हरे कृष्ण का अखंड कीर्तन चल रहा है। इसमें आसपास के 31 गांवों के श्रद्धालु बारी-बारी से आकर कीर्तन करते है। रात्रि के प्रहर मे रामधुन की आवाज दूर दूर तक सुनाई देती है।
महाकांल लोक के बाद महिमा बढ़ी
महाकांल लोक बनने के बाद गुजरात से आने उज्जैन जाने वाले कई यात्री इस तीर्थ की महिमा से प्रभावित होकर यहां दर्शन पूजन के लिए आते है। इसके अलावा श्रीमद् भागवत कथा, महारूद्र यज्ञ आदि आयोजन भी अनेक बार हो चुके है। इससे हजारों की संख्या में दूर दराज स्थानों से यहां श्रद्धालु आते है। यदि यह तीर्थ पर्यटन के रूप में विकसित हो जाता है तो न सिर्फ कोटेश्वर महादेव की महिमा बढ़ेगी वरन श्रद्धालुओं के आने जाने से रोजगार भी उत्पन्न होंगे। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भी सुधार होंगा।
: कल होगा 9 दिवसीय श्री बैजनाथ महादेव मेले का शुभारंभ
Thu, Apr 4, 2024
नगर परिषद ने नवाचार अपनाते हुए कई बदलाव किए: शहीदों के नाम पर बनाए चौराहे
बदनावर। नगर के विख्यात श्री बैजनाथ महादेव मेले का शुभारंभ कल होगा। लोगों की मांग व बढ़ती भीड़ के कारण मेले के दिन भी अब 7 से बढ़ाकर 9 दिन कर दिए गए हैं। 9 दिवसीय मेले का 13 अप्रैल को समापन होगा। चुनावी आचार संहिता के कारण इस बार मेले का शुभारंभ एसडीएम दीपक चौहान व एसडीओपी शेर सिंह भूरिया के आतिथ्य में होगा।
नगर परिषद सीएमओ संतराम चौहान ने बताया कि शुक्रवार शाम 6:30 बजे मेला स्थल पर सादे समारोह में मेले का शुभारंभ किया जाएगा। मेले में दुकानदारों का आना शुरू हो गया है। वही झूले लगने भी शुरू हो गए है।
मेले में इस बार 5 प्रवेशद्वार बनाए गए
नगर परिषद अध्यक्ष मीना शेखर यादव व मेला समिति अध्यक्ष अनिता संतोष चौहान ने बताया की इस बार नगर परिषद ने नवाचार अपनाते हुए मेले में कई बदलाव किए हैं। मेले में प्रवेश के लिए चार की बजाय पांच प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। जिनके नाम श्री चिंतामन गणेश द्वार, श्री बैजनाथ महादेव द्वार, एकवीरा द्वार, नागेश्वर महादेव द्वार व श्री आनंदेश्वर महादेव द्वार नाम रखा गया है। आनंदेश्वर महादेव मॉर्ग में झूले, चकरी व मनोरंजन के साधन मौजूद रहेंगे। जबकि एकवीरा मॉर्ग में मीना बाजार लगेगा। इसके अलावा मेले में 4 चौराहे बनाए जा रहे है। जिनके नाम चंद्रशेखर आजाद चौराहा, भगतसिंह चौराहा, महाराणा प्रताप चौराहा और रानी लक्ष्मीबाई चौराहा नाम रखा गया है। वही मेले में बच्चों के स्तनपान, बुजुर्गों के बैठने के लिए आँचल आश्रय बनाया जा रहा है। जहां महिलाएं आराम से बैठ सकेगी।
उन्होंने बताया कि मेले में बीस फिट के रास्ते बनाए गए है। ताकि भीड़भाड़ में अव्यवस्था न हो। मेले के अवसर पर 11 अप्रेल को बस स्टैंड पर भजन संध्या रखी गई है। जिसमे प्रसिद्ध भजन गायक मनोज शर्मा दिल्ली अपनी टीम के साथ भजनों की प्रस्तुतियां देंगे। वही मेले में तेजाजी नाट्य का आयोजन भी होगा। मेला आयोजन की यहां 127 वर्ष पुरानी परंपरा है। मेले को लेकर नगर समेत अंचल में उत्साह है। रोज हजारों की संख्या में लोग मेला देखने आते है।