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: शिवमहापुराण कथा का आज 5 वां दिन: शिव पार्वती विवाह हुआ, छप्पन भोग लगाकर प्रसाद बांटी,

Kailash Gupta

Fri, Jan 12, 2024
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    बदनावर। यहां प्राचीन बैजनाथ महादेव मंदिर में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का आज पांचवा दिन है। कथा में शिव पार्वती विवाह प्रसंग पर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथावाचक पंडित महेश पाराशर शास्त्री ने कथा में शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग बताते हुए कहा कि, यह पवित्र संस्कार है, लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है, ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। जब सती के विरह में भगवान शंकर की दशा दयनीय हो गई, सती ने भी संकल्प के अनुसार राजा हिमालय के घर पर्वतराज की पुत्री होने पर पार्वती के रुप में जन्म लिया। पार्वती जब बड़ी हुईं तो हिमालय को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। एक दिन देवर्षि नारद हिमालय के महल पहुंचे और पार्वती को देखकर उन्हें भगवान शिव के योग्य बताया। इसके बाद सारी प्रक्रिया शुरु तो हो गई, लेकिन शिव अब भी सती के विरह में ही रहे। ऐसे में शिव को पार्वती के प्रति अनुरक्त करने कामदेव को उनके पास भेजा गया, लेकिन वे भी शिव को विचलित नहीं कर सके और उनकी क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए। इसके बाद वे कैलाश पर्वत चले गए। तीन हजार सालों तक उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की। इसके बाद भगवान शिव का विवाह पार्वती के साथ हुआ। कथा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती के पात्रों का विवाह कराया गया। विवाह में सारे बाराती बने और खुशिया मनाई। विवाह के अवसर पर श्रदालु जमकर थिरके व भजन कीर्तन किए। प्रवचन में उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति इतनी श्रद्धा समर्पित कर देना कि जगत में कोई और साथ दे ना दे कोई बात नहीं, लेकिन इतना विश्वास अपने अंदर बनाए रखना कि मेरा आराध्य मेरा शंभू मेरी सहायता जरूर करेगा। यह सब कुछ आपने कर लिया, तो उसके बाद आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं। आपका भाग्य भगवान के हाथों में रहेगा, फिर शिव जीवन का उद्धार करेंगे। कथा के पहले रोज यहां सुबह 9 बजे से 11 बजे तक पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक भी हो रहा है। उसके बाद प्रतिदिन दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक कथा सुनाई जा रही है। आज कथा में 56 भोग भी लगाया गया। आरती के पश्चात महाप्रसादी का वितरण हुआ। कथा को लेकर नगर में उत्साह देखा जा रहा है। 14 जनवरी को कथा का समापन होगा।

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