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सांसद कुलदीप इंदौरा ने संसद में उठाया : वन भूमि पर बसे लोगों के नियमितीकरण का मुद्दा

Kailash Gupta

Sat, Apr 4, 2026
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नई दिल्ली। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सांसद कुलदीप इंदौरा ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान वन भूमि, जोहड़ पायतन, नर्सरी पर वर्षों से बसे लोगों के नियमितीकरण तथा वन भूमि के समुचित उपयोग का गंभीर मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल ए खड़े किए।

सांसद श्री इंदौरा ने कहा कि देशभर में, विशेषकर राजस्थान में, थे बड़ी संख्या में लोग लंबे समय से वन न भूमि, नर्सरी जोहड़ पायतन पर निवास कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनका की नियमितीकरण नहीं किया गया है। न तो उन्हें भूमि के पट्टे दिए जा रहे है और न ही वे सरकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि का इन लोगों की इसमें कोई गलती नहीं है, क्योंकि जब ये लोग वहां बसे, उस समय प्रशासन और संबंधित विभागों को उचित कार्रवाई करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई।

इंदौरा ने कहा कि आज स्थिति यह है कि उन्हीं क्षेत्रों में सरकार अन्य द्वारा स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं, लेकिन वहां रहने वाले गरीब लोगों को उनके अधिकार देने में लगातार देरी की जा रही है। एक ओर सरकार विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

सांसद इंदौरा ने वन भूमि के उपयोग को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर जिसे वन भूमि बताया जाता है, वहां न तो पेड़-पौधे है और न ही कोई वास्तविक वन क्षेत्र विकसित किया गया है। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां एक ओर जिला हनुमानगढ़ रावतसर के गांव 10 DWD में लगभग 12.525 बीघा भूमि पर लोग बसे हुए हैं. वहीं उसके सामने इतनी ही भूमि वर्षों से खाली पड़ी है, जिसे कागजों में वन भूमि या नर्सरी के रूप में दर्ज किया गया है, लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन बसे हुए लोगों को हटाने की बात करते हैं, लेकिन खाली और अनुपयोगी वन भूमि के बेहतर उपयोग की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हनुमानगढ़ के 10,000 के लगभग कोहला फार्म जैसे बड़े वन क्षेत्र आज भी बंजर पड़े हैं, जिनका उपयोग आवारा पशुओं के संरक्षण, चिकित्सा सुविधा और जल व्यवस्था के लिए किया जा सकता है।

सांसद कुलदीप इंदौरा ने मांग की कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे कर भूमि पर बसे लोगों का नियमितीकरण करे, उन्हें उनके अधिकार प्रदान करे तथा उपलब्ध सरकारी भूमि का वैज्ञानिक और व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जनकल्याण भी सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गरीबों और वंचित वर्ग के हितों के प्रति गंभीर है, तो उसे इस मुद्दे पर तुरंत ठोस और न्यायसंगत निर्णय लेना चाहिए।

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