बदनावर के जैन सोशल ग्रुप सदस्य दंपत्तियों ने : सेवा धाम आश्रम पहुंचकर विक्षिप्तों की सेवा गतिविधियों में सहभागी बने
Kailash Gupta
Mon, Jan 12, 2026

बदनावर। श्री भोयरा वाला आदेश्वर प्रभु व गुरु भगवंतों की असीम कृपा से अपने सेवा प्रकल्प के अंतर्गत जैन सोशल ग्रुप बदनावर के सदस्य दंपत्तियों ने परिवार सहित एक दिवसीय यात्रा के दौरान उज्जैन जिले में स्थित सेवाधाम आश्रम अंकित ग्राम पहुंचकर सेवा गतिविधियों में सहभागिता की। संचालित सेवा प्रकल्प को देखकर ग्रुप के सदस्यों ने संचालक की निःस्वार्थ सेवा कार्य की भूरी-भूरी अनुमोदना की। "सेवाधाम" अर्थात निःस्वार्थ सेवा का अकल्पनीय आश्रम है। जहां व्यवस्थापक सुधीर भाई गोयल के सुव्यवस्थित मार्गदर्शन में निःसहाय, विभिन्न बीमारियों एवं मानसिक रूप से विक्षिप्त बेसहारा लगभग 1250 पुरुष, महिलाएं एवं बच्चों की आत्मीयता से देखभाल की जा रही है।
सेवाधाम की सभी को विजिट करवाई
सुधीर भाई एवं टीम ने सर्व प्रथम ग्रुप के सदस्य दंपत्तियों एवं बच्चों को सेवाधाम की प्रारंभ अब तक की डॉक्यूमेंट्री दिखाई। पश्चात पूरे आश्रम की विजिट करवाकर महिला, पुरुष व बच्चों से मिलवाकर आश्रम की पूरी जानकारी एवं आगामी योजना भी बताई। इसमें एक हॉस्पिटल भवन का निर्माण भी चल रहा है। जिससे यहां के सभी विक्षिप्तों को तत्काल एवं सुलभता से उपचार की सुविधा मिल सकेगी। ग्रुप के सदस्य दम्पत्ति व बच्चें उन सभी लोगों से मिले एवं उन्हें भोजन भी परोसा। नेत्रहीन भोली बहन के कोकिल कंठ से "जैन धर्म के हीरे मोती मै बिखराऊं गली गली, ले लो रे कोई प्रभु का प्यारा शोर मचाऊं गली गली" एवं "सुमन कुंज से लाकर सौरभ स्वागत पथ सजाया है, प्रेमभाव के मनवे आकर अतिथि का गुण गाया है" जैसे सुंदर भजन सुनकर सभी अभिभूत हो गए। सेवाधाम में व्यवस्थापक के रूप में अदभुत सेवा देने वाले सुधीर भाई एवं इनकी धर्मपत्नी का ग्रुप की ओर से ग्रुप अध्यक्ष पीयूष राखी राय सोनी, सचिव अनिल मोनिका मूणत एवं कार्यकारिणी सदस्य आशीष सपना डांगी दम्पत्ति ने शॉल माला श्रीफल आदि से बहुमान किया। वहीं सुधीर भाई ने सेवा के माध्यम से ग्रुप के सभी दंपत्ति सदस्यों व बच्चों का सेवाधाम व जैन प्रतीक दुपट्टे से स्वागत किया।
जिसने दुखियों को जाना उसने मुझे पहचाना
इस अवसर पर सुधीर भाई ने कहा कि जैन सोशल ग्रुप जो यहां सेवा कार्य में सहयोगी बना इसके लिए अनुमोदना करता हूं। आप भगवान महावीर स्वामी के कथानुरागी एवं उनके पथ चिन्हों पर चलने वाले है। भगवान ने जीव दया एवं मानव सेवा को सर्वोच्च बताया है। भगवान का कहना है जिसने दुखियों को जाना, उसने मुझे पहचाना है। जो भी दुखियों, पीड़ितों, जीवों, पक्षियों, गौमाता आदि के प्रति संवेदनशील होता है, भगवान उस पर सदैव अपने आशीषों की वर्षा करते है। हमें जीवन एवं मानवता के यथार्थ की पढ़ाई करना है। बेघर, बेसहारा सड़क पर घूम रहे महिला, पुरुष, बच्चों की हम मदद कैसे कर सकते है उस पर चिंतन करना है। सप्ताह में एक दिन उपवास करके, अपने मौज शोक व व्यर्थ के खर्च में कमी करके उस राशि से इनकी मदद कर सकते है। सुधीर भाई ने यह भी कहा कि बदनावर ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष विजय बाफना ने ज्ञानदीप मंडल के माध्यम से 45 से अधिक बेसहारा एवं विक्षिप्तों को सेवाधाम भेजकर मानव सेवा का पुण्य अर्जित किया है।
सर्वस्व देकर सर्वस्थ को प्राप्त कर रहे है
ग्रुप अध्यक्ष पीयूष रायसोनी ने कहा कि सुधीर भाई अपना सर्वस्व देकर सर्वस्थ को प्राप्त कर रहे है और इन्होंने एक नए संसार की रचना की हैं। जीवनभर की पूंजी इस आश्रम को दी है। इस आश्रम से जुड़कर हम भी शक्ति अनुसार सहयोगी बन सकते है और अंकित ग्राम के विकास को गति दे सकते है। सुधीर भाई की सेवाएं प्रेरणादायी है। ऐसी सेवा देने वाले विरले ही मिलते है। आश्रम के माध्यम से इनकी सेवा इसी तरह निर्बाध रूप से चलती रहे ताकि निःसहाय लोगों का जीवन सुलभता से बीत सके। ग्रुप सदस्यों की ओर से सेवाधाम आश्रम में 31 हजार रुपए दान राशि की घोषणा की गई। जिससे आश्रम की आवश्यकता अनुसार सामग्री क्रय कर प्रदान करने की जाएगी।
देहदान अवसर के साक्षी बने
वहां एक चंचल बहन का निधन होने पर उनके परिवारजन ने देहदान की घोषणा की। चंचल बहन को गार्ड ऑफ ऑनर से सलामी देकर देह सीहोर मेडिकल कॉलेज की टीम को सुपुर्ग किया। ग्रुप भी इस प्रसंग का साक्षी बना।
ग्रुप सदस्य दंपत्तियों ने जैन तीर्थों के भी किए दर्शन
श्रीसंघ के सदस्यों ने सेवाधाम के बाद उज्जैन के प्रसिद्ध अभ्युदय अलौकिक पार्श्वनाथ जैन तीर्थ, श्री अवंतिका पार्श्वनाथ जैन तीर्थ, मणिभद्र जैन तीर्थ, महाकाल महालोक आदि विभिन्न तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर प्रभु दर्शन का लाभ लिया। सेवा गतिविधियों में बच्चों की सहभागिता विशेष रूप से सराहनीय रही, जिससे संस्कारों के बीजारोपण का सशक्त संदेश समाज को मिला। जैन सोशल ग्रुप का यह आयोजन सेवा, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति समूह की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भविष्य में भी ऐसे सेवा-आधारित एवं धार्मिक कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया गया।
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