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: सभी आठों कर्मों को क्षय कर देंगे, तभी जीव सिद्ध बन सकता हैं, जैन उपाश्रय पौषध शाला बखतगढ़ में धर्मसभा में तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी ने फरमाया

Kailash Gupta

Sun, Nov 13, 2022
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बखतगढ़। जिनशासन गौरव आचार्यश्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य एवं धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी के आज्ञानुवर्ती संघहित चिंतक तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी, तपस्वीश्री हेमंतमुनिजी, बदनावर गौरवश्री आदित्यमुनिजी, स्वाध्याय प्रेमीश्री शुभेशमुनिजी एवं बखतगढ़ के सांसारिक भानेज सेवाभावीश्री प्रशस्तमुनिजी ठाणा 5 के सानिध्य का श्रावक श्राविकाएं अच्छा लाभ ले रहे हैं। बदनावर, कोद, कानवन, हाटपिपलिया, उज्जैन आदि संघों से भी दर्शनार्थी यहां पहुंचे एवं दर्शन, वंदन, मांगलिक, ज्ञान चर्चा आदि का लाभ लिया। जैन उपाश्रय पौषध शाला बखतगढ़ में धर्मसभा में तत्वज्ञश्री धर्मेंद्रमुनिजी ने फरमाया कि जीव जहां भी जाएगा जिस गति में भी जाएगा, वहां कर्म तो साथ ही रहने वाले हैं। अपने अंतिम समय में सभी आठों कर्मों को क्षय कर देंगे, तभी जीव सिद्ध बन सकता हैं। वैराग्य भाव आएंगे तभी दीक्षा ले सकेंगे। संसार में सिर्फ पाप ही पाप करना पड़ता है। उसे कैसे भुगतेंगे, यह देखकर चिंतन करेंगे तो जीव को वैराग्य आता है और वह संसार को छोड़कर दीक्षा के लिए आगे बढ़ता है। पाप क्रिया करते हैं तो दुख मिलता है। इस भव में नहीं तो अगले भव में पाप क्रिया का भुगतान करना ही पड़ेगा। रागी पर राग और द्वेषी पर  द्वेष नहीं करेंगे तो कर्म बंद नहीं होंगे। सामायिक की आराधना करते हैं उस समय कम से कम पाप से जीव बचता है। सामायिक की कीमत अमूल्य है। इसे खरीदी या बेची नहीं जा सकती है।
दीक्षा लेना कायरता नहीं अपितु वीरता है
स्वाध्याय प्रेमीश्री शुभेशमुनिजी ने कहा कि आत्मा में अनंत शक्ति समाई हुई है। संसार को छोड़कर दीक्षा लेना कायरता नहीं अपितु वीरता है। संसार में दुख ही है। पुण्य के प्रभाव से मिला सांसारिक क्षणिक सुख को छोड़कर दीक्षा अंगीकार कर परिषह को सहन करने वाले वीर होते हैं। संसारी जीव की बदला लेने की भावना होती है जो शाश्वत सुख को पाने में अवरोध बनती है। मनुष्य एवं तिर्यंच ये दोनों गति के जीव देव बनते हैं। देवलोक में भी सुख नहीं है। वहां भोग विलास में लिप्त होकर जीव फिर से कर्म का बंध कर लेता है। मोक्ष केवल मनुष्य भव के द्वारा ही मिल सकता है। इसीलिए देव भी मनुष्य भव को पाने के लिए लालायित रहते हैं। धर्मसभा का संचालन वर्धमान बोहरा ने किया।

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