: श्रीरामकथा ही राष्ट्रकथा है - मुकेश मोलवा
Kailash Gupta
Fri, Feb 4, 2022
बदनावर। राम ने अस्पर्श्य कहे जाने वाले निषाद को गले लगाया, केवट को गले लगाया, शबरी के जूठे बैर खाए, जटायु को पिता सा सम्मान दिया, गिलहरी से स्नेह किया, भालु-वानरों से मित्रता की, लंका जीतकर विभीषण को सौंप दी, कह दिया कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी, न किसी से राग न किसी से द्वेष, न दर्प न अभिमान न ही प्रसन्नता न खिन्नता, एक समान भाव, यहां तक कि राम राष्ट्र की संस्कृति में इतने रम गए कि सम्बोधन भी राम राम हो गया। रघुकुल शिरोमणि श्री राम की कथा ही राष्ट्र कथा है, यह विचार राष्ट्रीय कवि मुकेश मोलवा ने समीपस्थ गांव कंकराज में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में कही, लगभग डेढ़ घन्टे के अपने सम्बोधन में कवि मोलवा ने देश धर्म संस्कृति राष्ट्र के साथ आत्मनिर्भर भारत में श्रीराम का जीवन कैसे शिक्षा प्रदान करता है, आजादी के अमृत महोत्सव में मर्यादापुरुषोत्तम के जीवन से हमें क्या प्रेरणाएं मिलती विषय पर हजारों श्रोताओं को आत्ममुग्ध कर दिया। श्री राम दरबार शिव जी एवं गणेश जी मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पांच दिवसीय आयोजन में पंच कुंडी यज्ञ में सैकड़ो की संख्या में मातृशक्ति एवं गणमान्य उपस्थित रहे। आयोजन समिति के मोहन पटेल, रामेश्वर सरपंच, भरतलाल परमार, गंगाराम पटेल, दिलीप झाला एवं समस्त ग्रामवासी थे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में नवीन चौहान, धर्मेंद्र अग्निहोत्री राहुल सिर्वी मुंगेला, बलराम काग, लोकेंद्र पँवार, प्रवीण ने राष्ट्रीय कवि मुकेश मोलवा का स्वागत किया।
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