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: विश्व के प्रथम गणराज्य वैशाली में जन्म थे बालक वर्धमान जो कर्म की बेड़ियां तोड़ कर बने भगवान महावीर

Kailash Gupta

Wed, Apr 13, 2022
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विश्व की प्रथम गणराज्य व्यवस्था का जनक है भारत

बदनावर। जिस जिस गणतंत्र व्यवस्था में आज हम जी रहे हैं, उस व्यवस्था का जन्म भारत में ही वैशाली गणराज्य से हुआ था। कुछ लोगों का मानना है कि विश्व की गणतंत्र व्यवस्था रोमनो कि देन है, परंतु यह भ्रांति पश्चिम द्वारा फैलाई गई है जबकि सत्यता यह है कि भारत के प्रथम गणराज्य की स्थापना वैशाली में ही हुई थी। ईसा से 599 वर्ष के बालक वर्धमान का जन्म कुण्डग्राम में हुआ था तब वैशाली गणतंत्र था। अतः गणतंत्र व्यवस्था का जन्म पश्चिम में नहीं बल्कि भारत के वैशाली गणराज्य में ही हुआ था। आज सम्पूर्ण विश्व वैशाली के राजकुमार बालक वर्धमान जो बाद में अपने तप बल से भगवान महावीर बने जिनका 2621 वां जन्म कल्याणक महोत्सव मना रहा है।उक्त जानकारी देते हुए डाक टिकट संग्राहक ओम पाटोदी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा भगवान महावीर के 2500 निर्वाण कल्याणक महोत्सव एवं 2600 वें जन्म कल्याणक वर्ष पर दो विशेष डाक टिकट जारी किए थे। 13 नवम्बर वर्ष 1974 और वर्ष 6 अप्रैल वर्ष 2000 में जारी यह दोनों डाक टिकट पाटोदी के संग्रहण में उपलब्ध है।पाटोदी ने बताया कि तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। 12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में सम्पूर्ण मानवजाति को सत्य अहिंसा का उपदेश दिया। 72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज द्वारा महावीर स्वामी के जन्म दिवस को महावीर जन्म कल्याणक तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है।आज नगर में भी समग्र जैन समाज द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। *नगर का भगवान महावीर से है विशेष सम्बन्ध*बदनावर नगर एक प्राचीन नगर है जिसका संबंध भगवान महावीर से रहा है, प्राचीन समय में बदनावर का नाम वर्द्धमानपुर था यहां पर भूगर्भ से कई प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हुई है इसमें भगवान महावीर व सैकड़ों जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई है। वर्तमान में जवाहर मार्ग स्थित जैन मंदिर में भगवान महावीर व अन्य जैन तीर्थंकर की नगर मे उत्खनन द्वारा प्राप्त मूर्ति विराजित है। ये सभी मूर्तियां 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन है।

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