: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 80 लाख की लागत से बना खेल स्टेडियम
Kailash Gupta
Tue, Mar 14, 2023
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आरईएस विभाग की उदासीनता के चलते सात साल बाद भी उपेक्षित और अपूर्ण है खेल स्टेडियम
बदनावर। एक समय था जब शासकीय तंत्र लाल फीताशाही के लिए बदनाम हुआ करता था। विभिन्न योजनाएं स्वीकृति से लेकर क्रिन्यावन्यन लेकर फाईलों में सम्मिलित होकर बरसों कार्यालयों में धूल खाती रहती थी। कालांतर में उनमें कुछ सुधार अवश्य हुआ है किंतु कहीं कहीं अब भी योजनाओं को क्रियान्वित करने में कुछ सरकारी नुमाईंदो की मनोवृति में खासा परिवर्तन नही आया है। इस कारण लाखों करोड़ों रूपए की जनहितेषी योजनाएं समय रहते धरातल पर पूरी नही हो पाती है। इसका जीता जागता उदाहरण करीब 80 लाख रूपए की लागत का ग्रामीण खेल स्टेडियम है। जिसमे जमकर भ्रष्टाचार किया गया। इसकी निर्माण एजेंसी आरईएस विभाग है। जिसकी उदासनीता के कारण सात वर्षो पश्चात भी मैदान पूर्ण नही हो पाया है। अब जिम्मेंदार अधूरे निर्माण कार्यो को पूरा करने के लिए फिर से स्टीमेट तैयार करने की बात कह रहे है। इधर लोगों का कहना है कि 80 लाख की भारी भरकम राशि खर्च कर केवल बाउंड्रीवाल, गैलरी, कक्ष, लोहे के गेट लगाए है। यदि थोड़ी सी राशि उसके समतीकरण में और खर्च कर दी जाती तो यह मैदान शुरूआती समय से ही खेल गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता था। जनपद पंचायत क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उददेश्य से साल 2014-15 में करीब 80 लाख रुपए की स्वीकृत लागत से ग्रामीण खेल मैदान (स्टेडियम) की स्वीकृति मिली। साल 2015़-16 में इसका निर्माण पेटलावद मार्ग पर नागेश्वर धाम के आगे ग्राम पंचायत खेड़ा की भूमि मंे प्रारंभ किया गया। संबंधित निर्माण एजेंसी आरईएस विभाग की देखरेख में कार्य की शुरूआत हुई। 39 हजार वर्ग मीटर में स्टेडियम में बाउंड्रीवाल और कक्ष, गैलरी आदि निर्मित हो चुके है लेकिन मुख्य जगह मैदान अब तक पूर्ण नही पाया। इसका एक हिस्सा अभी तक उबड़-खाबड़ है। जिससे इसमें खेल गतिविधियां संचालित नही हो पाती है। जबकि जो निर्माण हो चुका है वो अब भी उपेक्षित रहने से धीरे धीरे जर्जर हो रहा है। लावारिस अवस्था में होने तथा समुचित देख-रेख के अभाव में कमरों से बिजली के बोर्ड, पंखे, बल्ब और कमरों की फर्श तक उखाड़कर बदमाश उखाड़कर ले गए। बाउंड्रीवाल में भी दरारें आने लगी है। शौचालय और मूत्रालय में गदंगी व्याप्त हो गई है। विभागीय उदासीनता के चलते मैदान अपूर्ण होने से यहां आज तक इस परिसर में किसी भी तरह की कोई खेल गतिविधि संचालित नही हो पाई है। हां कोविडकाल के पूर्व मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत सामूहिक विवाह का आयोजन जरूर किया गया था। समय समय पर खेलप्रेमियों तथा आमजन द्वारा इस स्टेडियम को पूर्ण करने की बात कहीं जाती है किंतु तीन चार वर्षो में स्टीमेट से आगे बात ही नही बढ़ पा रही है। जबकि विभाग द्वारा पूर्व में स्टेडियम को पूर्ण बताकर इसे ग्राम पंचायत खेड़ा के सुपुर्द करने की बात भी कही गई थी। किंतु खेड़ा पंचायत ने अपूर्ण खेल मैदान को अपने अधीन लेने से साफ इंकार कर दिया था। गत माह गांव गांव में में निकाली गई विकास यात्रा के दौरान भी इस स्टेडियम के कार्यो को पूर्ण करने की मांग लोगों ने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के समक्ष रखी। इसके बाद फिर से स्टीमेट तैयार करने की कवायद शुरू होने की सुगबुगाहट हो रही है।पहले समतीकरण किया नही अब इसके लिए दोबारा होगी शुरूआत
इस बारे में संबंधित निर्माण एजेंसी आरईएस के एसडीओ राजेश परमार का कहना है कि खेल मैदान को पूर्ण करने के लिए करीब 40 लाख की लागत का स्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा गया था किंतु फंड के अभाव में स्वीकृत नही हो पाया। अब मैदान के अंदर उबड़-खाबड़ वाले स्थान के समतीकरण का कार्य रोजगार गारंटी योजना के तहत किए जाने के बारे में प्रयास किए जाएंगे।इस संबंध में कांग्रेस आईटी सेल जिला अध्यक्ष अश्विन पाटीदार का कहना है कि-
आरईएस विभाग के 5 सालों के कामों की इमानदारी से जांच की जाए तो करोड़ों के भ्रष्टाचार निकलेंगे फाइलों में ही काम पूर्ण हो चुके हैं मगर इस खेल मैदान की तरह कई कार्य अपूर्ण है।
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