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: भगवान की मूर्ति के साथ-साथ भगवान के चरित्र को भी जीवन में धारण करना चाहिए

Kailash Gupta

Fri, May 6, 2022
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बदनावर। श्री आनंदेश्वंर महादेव मंदिर पर स्वर्ण कलश स्थापना में पंच कुण्डीय यज्ञ एवं नानी बाई का मायरा कथा का आयोजन किया जा रहा है यज्ञ की पूर्णाहुती 08 मई को होकर मंदिर पर स्वर्ण कलश की स्थापना होगी साथ ही 8 मई को विशाल भंडारा जैन धर्मशाला बदनावर में दोपहर 1 बजें से 4 बजें तक रहेगा। मंदिर स्वर्ण कलश स्थापना में ईश्वरसिंह डोडिया सांवरिया शाकप वाले की ओर से 2,51,000/- कि राशि दान में दी गई। नानी बाई का मायरा कथा का आयोजन बस स्टैंड पर बलवंती नदी तट पर 3 दिवसीय रात्रकालीन नानीबाई का मायरा कथा का आयोजन हो रहा है।भक्त की भगवान के प्रति जितनी गहरी श्रद्धा भक्ति होती है, उसी के अनुरूप भक्त को भगवान का दिव्य अनुदान वरदान प्राप्त होता है। भगवान कभी भक्त का साथ नही छोड़ते, चाहे कैसी भी परिस्थिति बनी हो।हमें भगवान की मूर्ति के साथ-साथ भगवान के चरित्र को भी जीवन में धारण करना चाहिए। ये बात तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा के पहले दिन पं.यश कौशिक ने कही। उन्होंने भगवान कृष्ण की दया और करुणाशीलता का कथा के माध्यम से उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। जहां भाव होते है वहां अभाव समाप्त हो जाते है। नानी बाई को मायरो कथा यह संदेश देती है कि ईश्वर के प्रति हम भक्ति भाव का एक कदम बढ़ाते है तो भगवान भक्त का समर्पण देखकर स्वयं अनेक कदम बढ़ाकर भक्त तक आ जाते है।जब हम भगवान के प्रति संवेदनाओं से भरा एक आंसू निकालते है तो भगवान खुशियों से भर देते है। श्रद्धा और विश्वास हमारे सनातम धर्म के मूल आधार है। नरसिंह की दानशीलता और भगवान के प्रति अटूट विश्वास के कारण भगवान स्वयं नानी बाई का मायरा ले जाते है और भक्त की लाज बचाते है।कथा के बीच बीच मे भक्ति गीतों पर श्रद्धालु जमकर थिरके। इस मौके पर युवा संत ऋषिराज महाराज व कथा वाचक कौशिक का आनंदेश्वर मंदिर समिति अध्यक्ष कोकसिंह पंवार, सवर्ण कलश स्थापना समिति अध्यक्ष प्रहलाद यादव व कार्यक्रम संयोजक मनोज सोमानी ने स्वागत किया। कथा में बड़ी संख्या में महिलाओं समेत अन्य श्रदालु उपस्थित थे।

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