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: ईस्ट इंडिया कंपनी का 130 वर्ष पुराना सर्विस पोस्टकार्ड और महारानी विक्टोरिया का लिफाफा संग्रहण में हुआ सम्मिलित

Kailash Gupta

Sun, Nov 13, 2022
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पोस्टकार्ड जबसे जारी हुआ तब से आज तक संदेश भेजने का सबसे सस्ता साधन है

  बदनावर। डाक टिकट संग्रहण का शौक अपने आप में एक अद्भुत शोक है। इसमे जितनी अधिक पुरानी डाक सामग्री संग्रहण में होती है वह संग्रहण उतना ही उम्दा गिना जाता है। डाक टिकटों के संग्राहक ओम पाटोदी के संग्रहण में पुरानी डाक सामग्री की सूची में ईस्ट इंडिया कंपनी का सर्विस पोस्टकार्ड जो की लगभग 130 वर्ष पुराना है और रानी विक्टोरिया का लिफाफा 4 मार्च 1902 जो 121 वर्ष पहले का है। सम्मिलित हुए। महारानी विक्टोरिया कि मृत्यु जनवरी 1901 मे हुई थी यह लिफाफा उनकी मृत्यु के लगभग एक वर्ष बाद का है। यह अमूल्य उपहार मालवा क्षेत्र के प्रसिद्ध फिलाटेलिस्ट डॉ. रविन्द्र नारायण पहलवान जी द्वारा पाटोदी को भेंट किए गए। श्री पहलवान पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से डाक टिकट के संग्रहण में जुड़े हुए हैं। आपको इस क्षेत्र में कई राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हए।   पाटोदी ने बताया कि पोस्ट कार्ड एक मोटे कागज या पतलै गत्ते से बना एक आयताकार टुकड़ा होता है जिसे संदेश लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है, साथ ही इसे बिना किसी लिफाफे में बंद किए डाक द्वारा भेजा जा सकता है। पोस्ट कार्ड का आविष्कार आस्ट्रिया में 1869 को हुआ था। वह इतना लोकप्रिय साबित हुआ कि एक महीने में ही 15 लाख पोस्ट कार्ड बिक गए।भारत में पहली बार 1 जुलाई 1879 को पोस्ट कार्ड जारी किए गए। डाक टिकटों के समान ही लोग पोस्ट कार्ड का भी संग्रह करते हैं। इस हावी को अंग्रेजी में डेल्टियोलजी कहा जाता है। आज के विद्यार्थियों में इन पोस्ट सामग्री जानकारी का बहुत आभाव है, क्योंकि आज का विद्यार्थी सोशल मीडिया और नेट ईमेल के साथ पला बड़ा हुआ है । भारत सरकार इण्डिया पोस्ट से विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए कई तरह कि प्रतियोगिता एवं कार्यक्रम आयोजित करती रहती है।   भारत के डाकघर ने एक चौथाई आना पोस्टकार्ड जुलाई 1879 में चलन में लाया गया किया ब्रिटिश भारत के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर पोस्ट किया जा सकता था । यह भारतीय लोगों को आज तक प्रदान किया जाने वाला सबसे सस्ता पोस्ट था और एक बड़ी सफलता साबित हुई। पोस्टकार्ड देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में भेजा जा सकता है, बिना अतिरिक्त डाक चिपकाए। इसके बाद अप्रैल 1880 में विशेष रूप से सरकारी उपयोग के लिए बने पोस्टकार्ड और 1890 में उत्तर पोस्टकार्ड आए। स्वतंत्र भारत में पोस्टकार्ड की सुविधा आज भी जारी है।

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