: कोरोना वायरस संक्रमण के केस बढ़ने लगे ,केन्द्र सरकार ने जारी किया अलर्ट
Sat, Apr 9, 2022
नई दिल्ली । चीन के बाद अब भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमण के केस बढ़ने लगे हैं कोरोना वायरस के नए XE वेरिएंट का भी एक केस गुजरात में सामने आया है।वैज्ञानिकों का कहना है कि जून माह तक भारत में कोरोना संक्रमण की चौथी लहर आने की संभावना है। देश के कई राज्यों में एक बार फिर कोरोना के संक्रमण दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, जिसके केंद्र सरकार की चिंता बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने इन राज्यों को सतर्कता बरतने का आदेश दिया है। जिन राज्यों में संक्रमण दर बढ़ रहे है, उनमें राज्यों में दिल्ली, महाराष्ट्र,केरल, हरियाणा,और मिजोरम शामिल है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कोरोना के नए मामलों की बढ़ोतरी पर सख्त निगरानी रखी जाए और अगर आवश्यक हो तो जरूरी कार्रवाई भी की जाए। भूषण ने पत्र में कहा कि राज्यों को संक्रमण के प्रसार की निगरानी जारी रखना चाहिए। कोविड-19 के त्वरित और प्रभावी प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है। चिंता वाले क्षेत्रों में नियमित निगरानी और तुरंत कार्रवाई महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट-टीकाकरण और कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करते हुए निगरानी होनी चाहिए। इस कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए रोकथाम के प्रयासों का पालन होना चाहिए। उन्होंने राज्यों से सभी स्वास्थ्य केंद्रों में फ्लू जैसी बीमारी (एलएलएल) और एसएआरआई मामलों की नियमित आधार पर निगरानी करने, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के निर्धारित नमूनों के लिए जीनोमिक सीक्वेंसिंग, जांच स्थलों से नमूनों का संग्रह (पहचान की गई स्वास्थ्य केंद्रों) करने के लिए कहा है।
: भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर का निधन देश में शोक की लहर
Sun, Feb 6, 2022
नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दिग्गज गायिका भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकरका निधन हो गया है। आज 6 फरवरी सुबह 92 वर्षीय लता मंगेशकर ने मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।दीदी के निधन की खबर लगते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक हर कोई दीदी को श्रद्धांजलि दे रहा है। उनसे मिलने शनिवार को बहन और गायिका आशा भोसले स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल परिसर के बाहर अवरोधक लगाए गए हैं और सुरक्षा कड़ी कर दी गई और वहां मीडियाकर्मियों का जमावड़ा लगा हुआ है।92 साल की लता जी की बीते महीने 8 जनवरी को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें निमोनिया भी हो गया था।उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल के ICU रखा गया था।डॉ. प्रतीत समधानी और डॉक्टर्स की टीम उनका इलाज कर रही थी, उन्हें लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया। करीब 5 दिन पहले उनकी सेहत में सुधार होने पर ऑक्सीजन निकाल दी गई थी लेकिन ICU में ही रखा गया। शनिवार को उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया था, लेकिन आज दीदी जिंदगी की जंग हार गई ।
: मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, ओबीसी आरक्षण बना वजह
Fri, Dec 17, 2021
नई दिल्लीः मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. द सुप्रीम कोर्ट ने आज पंचायत चुनाव को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई की और सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव को स्टे कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ओबीसी सीटों को फिर से नोटिफाई किया जाए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई है. जस्टिस एएम खानविलकर और सीटी रविकुमार की बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि सामान्य वर्ग की सीटों को फिर से रि-नोटिफाई कर उन्हें सामान्य वर्ग के लिए अधिसूचित किया जाए. लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने पाया कि ओबीसी आरक्षण का नोटिफिकेशन सर्वोच्च अदालत के पूर्व में दिए गए विकास किशनराव गवली वर्सेस महाराष्ट्र राज्य के फैसले के खिलाफ था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून का पालन नहीं होगा तो भविष्य में चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट अब 27 जनवरी को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे ही ओबीसी कोटा के चलते महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव में भी स्टे कर दिया गया था. याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा कोर्ट में पेश हुए. वहीं राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ और एडवोकेट कार्तिक सेठ ने रखा. विवेक तन्खा ने बताया कि कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को संविधान के हिसाब से चुनाव कराने का निर्देश दिया है. मध्य प्रदेश में आरक्षण रोटेशन प्रणाली का पालन नहीं किया गया है, जो कि संविधान की धारा 243 (C) का उल्लंघन है.
आग से मत खेलिए
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि "कृप्या आग से मत खेलिए. आपको स्थिति को समझना चाहिए. राजनीतिक मजबूरियों के आधार पर फैसले मत कीजिए. क्या हर राज्य का अलग पैटर्न होगा? सिर्फ एक संविधान है और आपको उसका पालन करना होगा. सुप्रीम कोर्ट भी एक ही है. यह चुनाव आयोग का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है. यह जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहा है.जब ऐसा ही एक आदेश दिया गया था, तब आप भी वहां थे. हम नहीं चाहते कि मध्य प्रदेश में कोई प्रयोग हो. महाराष्ट्र केस के हिसाब से इसे देखा जाना चाहिए."बता दें कि इससे पहले चुनाव में रोटेशन प्रणाली का पालन नहीं होने के चलते चुनाव पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई से इंकार करते हुए 3 जनवरी को सुनवाई करने की बात कही. इस पर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए शुक्रवार को सुनवाई तय की थी.